रुद्राक्ष पहनने के नियम: सही दिन, विधि, मंत्र और सावधानियां

रुद्राक्ष पहनने के नियम

रुद्राक्ष पहनने के नियम समझे बिना रुद्राक्ष धारण करना वैसा ही है जैसे बिना विधि जाने पूजा करना। हमारी दुकान पर हर हफ्ते कोई न कोई ग्राहक यही पूछता है कि रुद्राक्ष किस दिन पहनें, कौन सा मंत्र बोलें और किन बातों का ध्यान रखें। परंपरा में रुद्राक्ष को भगवान शिव का अंश माना गया है, इसलिए इसे धारण करने की एक मर्यादा भी मानी जाती है। सावन जैसे पवित्र महीने में तो यह सवाल और भी ज्यादा पूछा जाता है। यहां वही सब नियम सरल हिंदी में लिखे हैं जो हम अपने ग्राहकों को रोज बताते हैं।

Key takeaways

  • सोमवार, शिवरात्रि या सावन का कोई भी दिन रुद्राक्ष धारण के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
  • धारण से पहले रुद्राक्ष को गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करके ओम नमः शिवाय का जाप करने की परंपरा है।
  • रुद्राक्ष लाल या पीले धागे, चांदी या सोने में पहनने की सलाह दी जाती है।
  • महिलाएं और पुरुष दोनों रुद्राक्ष पहन सकते हैं, शुद्धता के सामान्य नियम सबके लिए एक जैसे हैं।

रुद्राक्ष क्या है और यह इतना पवित्र क्यों माना जाता है

रुद्राक्ष असल में एक वृक्ष का सूखा बीज है। वनस्पति विज्ञान में इस वृक्ष को एलेओकार्पस कहा जाता है, जो नेपाल, इंडोनेशिया और भारत के कुछ हिस्सों में उगता है। पकने पर इसका फल नीले रंग का होता है, इसीलिए इसे कहीं कहीं ब्लूबेरी बीड भी कहते हैं। रुद्राक्ष शब्द दो शब्दों से बना है, रुद्र और अक्ष, यानी रुद्र के आंसू। रुद्र वैदिक काल में भगवान शिव का ही एक नाम रहा है।

पुराणों की कथा है कि लंबी तपस्या के बाद जब भगवान शिव ने नेत्र खोले तो करुणा के अश्रु धरती पर गिरे और उन्हीं से रुद्राक्ष वृक्ष की उत्पत्ति हुई। हिंदी विश्वकोश में भी यही कथा मिलती है। इसी मान्यता के कारण शिव भक्त इसे साक्षात शिव का प्रसाद मानकर धारण करते हैं। रुद्राक्ष पर बनी धारियों को मुखी कहा जाता है, एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक, और हर मुखी की अपनी परंपरागत मान्यता है। इस विषय पर हमारा 5 मुखी रुद्राक्ष के फायदे वाला लेख विस्तार से पढ़ा जा सकता है।

संबंधित देवता भगवान शिव (रुद्र)
मुख्य स्रोत नेपाल, इंडोनेशिया (जावा), भारत
सबसे लोकप्रिय 5 मुखी रुद्राक्ष, दैनिक धारण के लिए
शुभ दिन सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन का महीना
मंत्र ओम नमः शिवाय, कम से कम 108 बार
धागा या धातु लाल या पीला धागा, चांदी या सोना

रुद्राक्ष पहनने के नियम क्यों जरूरी हैं

कोई भी पवित्र वस्तु तभी फल देती है जब उसका आदर हो, ऐसा हमारे शास्त्र मानते हैं। रुद्राक्ष को गले या कलाई का साधारण गहना नहीं, बल्कि एक जीवित ऊर्जा माना गया है। इसलिए परंपरा में इसके धारण, स्पर्श और देखभाल के स्पष्ट नियम बताए गए हैं। नियम कठिन नहीं हैं, बस थोड़ी सजगता मांगते हैं। विद्यार्थी, गृहस्थ, व्यापारी, साधक, कोई भी इन्हें आसानी से निभा सकता है।

परंपरा में रुद्राक्ष धारण के जो लाभ बताए जाते हैं, वे इस प्रकार हैं। ध्यान रहे, ये आस्था और परंपरा की बातें हैं, किसी रोग का इलाज नहीं। वैसे यह रोचक है कि रुद्राक्ष के वृक्ष पर वैज्ञानिक अध्ययन भी होते रहे हैं, जिनमें इसके पौधे के गुणों की जांच की गई है।

  • मन की शांति: माना जाता है कि रुद्राक्ष धारण करने से मन स्थिर रहता है और क्रोध कम होता है।
  • एकाग्रता: जप और ध्यान में बैठने वालों के लिए रुद्राक्ष को एकाग्रता का सहायक माना गया है।
  • रक्षा कवच: परंपरा में इसे नकारात्मक ऊर्जा से बचाने वाला कवच कहा जाता है।
  • शिव कृपा: शिव भक्तों के लिए यह भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
  • ग्रह शांति: ज्योतिष परंपरा में अलग अलग मुखी रुद्राक्ष अलग अलग ग्रहों से जोड़े जाते हैं।
  • अनुशासन: रोज धारण और जप की आदत जीवन में एक सात्विक दिनचर्या बना देती है।

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रुद्राक्ष पहनने के नियम: सही दिन, विधि और मंत्र

किस दिन धारण करें

सोमवार भगवान शिव का दिन है, इसलिए रुद्राक्ष धारण के लिए सोमवार सबसे उत्तम माना जाता है। महाशिवरात्रि, सावन का कोई भी सोमवार और प्रदोष तिथि भी बहुत शुभ मानी जाती है। अगर इनमें से कोई दिन दूर हो तो किसी भी दिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन से धारण किया जा सकता है, परंपरा में भाव को दिन से ऊपर रखा गया है।

धारण विधि, पांच आसान चरण

  • शुद्धि: रुद्राक्ष को गंगाजल या कच्चे दूध से धोकर साफ कपड़े से पोंछ लें।
  • स्थापना: पूजा स्थान पर शिवलिंग या शिव चित्र के सामने रुद्राक्ष रखें।
  • अभिषेक: चंदन या भस्म का हल्का तिलक रुद्राक्ष पर लगाने की परंपरा है।
  • जाप: ओम नमः शिवाय का 108 बार जाप करें, चाहें तो रुद्राक्ष माला से ही गिनती करें।
  • धारण: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष गले या कलाई में धारण कर लें।

कौन सा मंत्र जपें

सबसे प्रचलित मंत्र ओम नमः शिवाय है, जिसे शैव परंपरा का पंचाक्षर मंत्र कहा जाता है। कई साधक महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी करते हैं। जाप के लिए 108 दानों की 5 मुखी रुद्राक्ष माला सबसे उपयुक्त मानी जाती है। शिव पूजा की पूरी विधि पर यह लेख भी पढ़ने लायक है।

माला, ब्रेसलेट या लॉकेट: कौन सा रूप चुनें

रूप किसके लिए सही खासियत
108 दानों की माला जप और ध्यान करने वाले साधक जाप और धारण, दोनों काम एक साथ
रुद्राक्ष ब्रेसलेट रोज ऑफिस या कॉलेज जाने वाले हल्का, सुविधाजनक, हर पहनावे के साथ
रुद्राक्ष लॉकेट किसी खास मुखी को धारण करने वाले हृदय के पास रहता है, चांदी की सुरक्षा

रोज के लिए हमारा 5 मुखी रुद्राक्ष ब्रेसलेट सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, जबकि गले में धारण के लिए नेपाल का 5 मुखी लॉकेट अच्छा विकल्प है।

आम गलतियां जिनसे बचना चाहिए

  • काला धागा: परंपरा में रुद्राक्ष काले धागे में नहीं पहना जाता, लाल या पीला धागा चुनें।
  • बिना शुद्धि धारण: नया रुद्राक्ष बिना गंगाजल से शुद्ध किए सीधे नहीं पहनना चाहिए।
  • अशुद्ध स्थानों पर पहनना: शमशान या अंतिम संस्कार में जाते समय रुद्राक्ष उतारने की परंपरा है।
  • दूसरों को देना: अपना धारण किया रुद्राक्ष किसी और को पहनने के लिए नहीं दिया जाता।
  • साबुन और इत्र: नहाते समय साबुन और केमिकल से रुद्राक्ष को बचाएं, इससे बीड सूखकर कमजोर होता है।
  • टूटा रुद्राक्ष: खंडित रुद्राक्ष धारण नहीं किया जाता, उसे पीपल के नीचे या बहते जल में विसर्जित करने की परंपरा है।

Frequently asked questions

1. क्या महिलाएं रुद्राक्ष पहन सकती हैं?

हां, बिल्कुल पहन सकती हैं। शिव भक्ति में स्त्री और पुरुष का कोई भेद नहीं है। शुद्धता के जो सामान्य नियम पुरुषों के लिए हैं, वही महिलाओं के लिए भी हैं। कुछ परिवार मासिक धर्म के दिनों में रुद्राक्ष उतारकर पूजा स्थान पर रखने की परंपरा मानते हैं, यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था का विषय है।

2. रुद्राक्ष किस दिन पहनना चाहिए?

सोमवार सबसे शुभ माना जाता है। महाशिवरात्रि, सावन के सोमवार और प्रदोष भी उत्तम दिन हैं। शुभ मुहूर्त न मिले तो किसी भी दिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध भाव से धारण कर सकते हैं।

3. क्या सोते समय रुद्राक्ष पहन सकते हैं?

इस पर दो मत हैं। कई साधक इसे हमेशा धारण रखते हैं, जबकि कुछ परंपराएं रात में उतारकर पूजा स्थान पर रखने की सलाह देती हैं। ब्रेसलेट या माला टूटने का डर हो तो रात में उतारकर साफ स्थान पर रखना व्यावहारिक भी है।

4. रुद्राक्ष किस धागे में पहनना चाहिए?

लाल या पीला धागा सबसे शुभ माना जाता है। चांदी या सोने में मढ़वाकर पहनना भी उत्तम है। काले धागे से परंपरा में बचने की सलाह दी जाती है।

5. क्या रुद्राक्ष पहनकर मांसाहार या मदिरा ले सकते हैं?

परंपरा में रुद्राक्ष धारण करने वालों को सात्विक आहार की सलाह दी जाती है। अगर ऐसा अवसर हो तो उस समय रुद्राक्ष उतारकर शुद्ध स्थान पर रखने का चलन है। यह नियम कठोर बंधन से ज्यादा आदर का भाव है।

6. रुद्राक्ष की देखभाल कैसे करें?

महीने में एक बार गुनगुने पानी से धोकर मुलायम ब्रश से सफाई करें और सूखने के बाद हल्का सरसों या चंदन का तेल लगा दें। इससे बीड वर्षों तक मजबूत रहता है। समय समय पर पंचाक्षर मंत्र के जाप के साथ धूप दिखाकर पुनः ऊर्जित करने की परंपरा भी है।

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